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Sunday, July 26, 2026

रिम्स और राज हॉस्पिटल को किडनी ट्रांसप्लांट की मंजूरी, जल्द मिलेगा लाइसेंस…

राज्य में ही मिलेगा गंभीर बीमारियों का इलाज, बाहर जाने की जरूरत नहीं: अपर मुख्य सचिव

रांची:राज्य में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) और राज हॉस्पिटल को किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस देने पर सहमति बन गई है। दोनों संस्थानों को शीघ्र ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।

आज अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग अजय कुमार सिंह के कार्यालय कक्ष में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत गठित परामर्शदात्री समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर सचिव श्री विद्यानंद शर्मा पंकज, सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री शिवनारायण सिंह, निदेशक प्रमुख (स्वास्थ्य सेवाएँ) डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, डॉ. संजय कुमार, रिम्स के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश, नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा घोष पंत, उप सचिव ध्रुव प्रसाद सहित एनजीओ प्रतिनिधि श्रीमती सरिता पांडेय एवं प्रगति शंकर उपस्थित रहीं।

बैठक में सर्वसम्मति से रिम्स एवं राज हॉस्पिटल को किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस देने का निर्णय लिया गया। इससे राज्य में ही किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
इसके अलावा समिति में राज्य के अन्य सरकारी एवं निजी चिकित्सा संस्थानों में लिवर, हार्ट और किडनी ट्रांसप्लांट की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। इस संबंध में 15 जनवरी को राज्य के 10 चिकित्सा महाविद्यालयों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के अंतर्गत राज्य से बाहर इलाज के लिए भेजे जाने वाले मरीजों की संख्या कम करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य में ही बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर भी विचार किया जाए।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत एक विशेष पैकेज का निर्धारण किया गया है, ताकि गंभीर रोगों का इलाज राज्य में ही संभव हो सके। बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि ट्रांसप्लांट सहित सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ राज्य के भीतर उपलब्ध कराई जाएँ।

निर्णय के अनुसार, मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के अंतर्गत यदि कोई रोगी आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के दायरे में नहीं आता है, तभी उसे राज्य के बाहर इलाज की अनुमति दी जाएगी। योजना के अंतर्गत आने वाले मरीजों का इलाज राज्य में ही सुनिश्चित किया जाएगा।

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