सरकार ने सख्ती दिखाते हुए SKMCH की अधीक्षक को निलंबित किया, PMCH के उपाधीक्षक को हटाया गया, जांच के घेरे में कई डॉक्टर और नर्स
पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में दलित बच्चों की मौत के मामले में इलाज में लापरवाही सामने आई है। सरकार ने SKMCH अधीक्षक को निलंबित किया और PMCH उपाधीक्षक को हटाया। जांच जारी है, कई डॉक्टर-नर्स के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई।
Highlights:
सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर फिर उठा सवाल
बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर चर्चा में है। पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (PMCH) में इलाज में लापरवाही के कारण दो दलित बच्चों की मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज नहीं मिला, और चिकित्सकों व स्टाफ ने गंभीरता नहीं दिखाई।
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PMCH और SKMCH दोनों जांच के घेरे में
सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए PMCH पटना और SKMCH मुजफ्फरपुर—दोनों संस्थानों में जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित विशेष जांच समिति दोनों अस्पतालों के संबंधित विभागों और चिकित्साकर्मियों की भूमिका की समीक्षा कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, कई डॉक्टरों और नर्सों की जिम्मेदारी इस लापरवाही में तय हो सकती है। रिपोर्ट के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है।
पहली कार्रवाई: अधीक्षक और उपाधीक्षक पर गिरी गाज
सरकार की ओर से की गई त्वरित कार्रवाई के तहत SKMCH की अधीक्षक डॉ. विभा कुमारी को निलंबित कर दिया गया, जबकि PMCH के उपाधीक्षक अभिजीत को तत्काल प्रभाव से उनके पद से मुक्त कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है, और आगे कई अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
उपमुख्यमंत्री का सख्त संदेश
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा:
“जांच जारी है। किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। जो भी लापरवाही में शामिल है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
उनके इस बयान से साफ है कि सरकार स्वास्थ्य तंत्र में सुधार के लिए अब कोई कोताही नहीं बरतेगी।
स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। राज्य के कई अस्पतालों में प्रबंधन स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जा रहे हैं कि मरीजों की देखभाल में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
अधिकारियों का कहना है कि यह मामला एक मिसाल बनेगा ताकि किसी भी सरकारी अस्पताल में भविष्य में ऐसी गंभीर चूक न हो।
जनता में रोष और मांग: दोषियों को मिले कड़ी सजा
घटना के बाद आम जनता में गुस्सा साफ नजर आ रहा है। सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने मांग की है कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए ताकि गरीब और दलित वर्ग को अस्पतालों में भी सम्मान और समय पर इलाज मिल सके।






















