Dhanbad News: विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत धनबाद के 90 गांवों में कृषि वैज्ञानिक कर रहे हैं किसानों से सीधा संवाद
Dhanbad News: 29 मई से 12 जून तक चलने वाले विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत, मंगलवार को आत्मा धनबाद के सौजन्य से निरसा प्रखंड के साना गांव, पंचायत पांड्रा पूरब में एक कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रव्यापी अभियान में भारत के 700 जिलों में 2000 से अधिक वैज्ञानिक दल भाग ले रहे हैं, जिसका उद्देश्य 1.5 करोड़ किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें नई कृषि तकनीक, सरकारी कृषि योजनाओं की जानकारी देना और उनसे प्रतिक्रिया (फीडबैक) प्राप्त करना है। धनबाद जिले में यह अभियान 90 गांवों में चलाया जा रहा है।
Highlights:
कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों की उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन प्रखंड तकनीकी प्रबंधक मो. जावेद इस्लाम ने किया। इसमें बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वरीय वैज्ञानिक डॉ. बीरेंद्र कुमार और डॉ. भूपेंद्र कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र, बलियापुर के प्रमुख डॉ. राजीव कुमार, और वैज्ञानिक डॉ. सीमा सिंह सहित लगभग 70 किसानों ने हिस्सा लिया।
प्रमुख कृषि योजनाओं की जानकारी
BTM जावेद इस्लाम ने सबसे पहले कृषि विभाग की वर्तमान में चल रही प्रमुख योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। इनमें 50% अनुदान पर धान, मक्का, मूंग, उड़द, मूंगफली, मड़ुआ, ज्वार आदि के बीज की उपलब्धता, 90% अनुदान पर टपक/फौआरा सिंचाई सेट का अधिष्ठापन, डिजिटल क्रॉप सर्वे की योजना, और झारखंड राज्य मिलेट मिशन योजना प्रमुख रहीं।
उन्नत कृषि तकनीकों पर चर्चा
कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीरेंद्र कुमार ने विभिन्न प्रकार के खेतों जैसे टांड़ (ऊंची भूमि), कनाली (मध्यम भूमि) और बईहार (निचली भूमि) में खरीफ फसलों के चुनाव, और धान के विभिन्न प्रभेदों (किस्मों) के चयन के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने रोपाई के लिए 15 से 20 दिनों के बिचड़े को सबसे उपयुक्त बताया और बारिश की अनिश्चितता को देखते हुए हर 4-4 दिनों में धान के बीज डालने की सलाह दी।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार ने मृदा जांच के महत्व और उसकी योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, तिलहन का प्रथम पंक्ति प्रत्यक्षण (फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन), और नवीनतम कृषि तकनीकी की जानकारी प्रदान की। डॉ. भूपेंद्र कुमार ने उर्वरक प्रबंधन के विषय में विस्तार से बताया, जिससे किसान अपनी फसलों में सही मात्रा में खाद का प्रयोग कर सकें।
इस कृषक गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों और सरकारी सहायता के बारे में जागरूक करना था, ताकि वे अपनी उपज बढ़ा सकें और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।






















