निरसा:झारखंड में प्रखण्ड सह अंचल कार्यालयों की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि ग्रामीणों के कामकाज स्थानीय स्तर पर निपटाए जा सकें। लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। निरसा विधानसभा क्षेत्र के एग्यारकुण्ड प्रखण्ड सह अंचल कार्यालय का हाल यह है कि यहां बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता।
ग्रामीण ही नहीं, जनप्रतिनिधियों को भी अपने कार्यों के लिए महीनों तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
Highlights:
“चार महीने से ब्लॉक का चक्कर लगा रही हूँ…”
मोहुलबना कॉलोनी निवासी जया शर्मा बताती हैं कि उन्होंने अपनी जमीन का ऑनलाइन करवाने के लिए चार माह पहले आवेदन दिया था, लेकिन अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
उनका कहना है कि “मेरे ही प्लॉट के अन्य हिस्सों का ऑनलाइन कार्य पूरा हो गया, पर मुझे जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।”
“दलाल के ज़रिए जाएं तो 10 दिन में काम हो जाता है”
एग्यारकुण्ड प्रखण्ड अंतर्गत कुल 20 पंचायतें आती हैं। रोज़ाना सैकड़ों ग्रामीण अपने कार्यों को लेकर ब्लॉक पहुंचते हैं, लेकिन निराश होकर लौट जाते हैं।
मैथन कालीपहाड़ी के पंचायत समिति सदस्य योगेश सिंह का कहना है,“यहां आम जनता तो छोड़िए, जनप्रतिनिधियों का काम भी नहीं होता। अगर कोई दलाल के माध्यम से आता है तो दस दिन में काम पूरा हो जाता है। इससे साफ़ है कि प्रखण्ड में दलालों का कब्जा है। एग्यारकुण्ड प्रखण्ड धनबाद जिले का सबसे भ्रष्ट प्रखण्ड बन चुका है।”
“नेट नहीं है, इसलिए काम में देरी हो रही है”
जब इस मुद्दे पर प्रखण्ड सह अंचल कार्यालय के हल्का कर्मचारी इजहार अहमद ख़ान से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि उन्हें कार्यभार संभाले हुए दो माह हुए हैं।“झारभूमि का नेटवर्क पिछले कई महीनों से बंद है, जिसके कारण भूमि-संबंधी कार्य लंबित हैं। समस्या के शीघ्र समाधान की प्रक्रिया चल रही है।”
नेट की समस्या या लापरवाही की आड़ में भ्रष्टाचार?
जानकारी के अनुसार, एग्यारकुण्ड प्रखण्ड में झारभूमि का नेटवर्क कई माह से बाधित है। भूमि से संबंधित कार्य फिलहाल निरसा प्रखण्ड से किए जा रहे हैं।
लेकिन सवाल यह है कि नेटवर्क की तकनीकी समस्या का खामियाजा जनता क्यों भुगते? आखिर ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर जाएँ तो जाएँ कहाँ?
सरकार आपके द्वार — पर जनता दर-दर
राज्य सरकार एक बार फिर “आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार” कार्यक्रम शुरू करने जा रही है, ताकि जनता तक योजनाओं का लाभ पहुँचाया जा सके।
लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारियों की लापरवाही और बिचौलियों की पकड़ ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब ज़रूरत है कि मुख्यमंत्री हस्तक्षेप कर इस गम्भीर समस्या का समाधान करें, और प्रखण्ड कार्यालयों को बिचौलियों और भ्रष्टाचार से मुक्त कराएं।






















