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Monday, October 26, 2026

चार श्रम कानून जनविरोधी, मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला — अनुपमा सिंह…

12 तारीख की देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने की अपील

धनबाद:राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन की वर्किंग प्रेसिडेंट एवं कांग्रेस नेत्री अनुपमा सिंह ने भाजपा सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए श्रम कानूनों को मजदूर-विरोधी, गरीब-विरोधी, संविधान-विरोधी और पूरी तरह कॉर्पोरेट समर्थक करार दिया है। उन्होंने कहा कि ये कानून श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा नहीं करते, बल्कि मजदूरों की गुलामी को वैध बनाने का काम करते हैं।

 सिंह ने कहा कि सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समेटकर चार कोड बनाए हैं। नाम भले ही कम कर दिए गए हों, लेकिन मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों को उतनी ही तेजी से खत्म कर दिया गया है। यह सुधार नहीं, बल्कि मजदूरों के संगठित शोषण की सुनियोजित योजना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नए श्रम कानूनों के तहत 8 घंटे के कार्यदिवस की व्यवस्था को कमजोर कर 12 घंटे के कार्यदिवस का रास्ता खोला जा रहा है, जिसमें मजदूर से अधिक काम लिया जाएगा, लेकिन वेतन वही रहेगा। इसे “कानूनी सुधार” का नाम देकर शारीरिक और मानसिक शोषण को वैध बनाया जा रहा है।

सिंह ने कहा कि इन कानूनों में हड़ताल जैसे लोकतांत्रिक अधिकार को लगभग अपराध बना दिया गया है। बिना अनुमति हड़ताल पर रोक और सरकार को किसी भी समय हड़ताल को अवैध घोषित करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने कहा कि जब मजदूर से हड़ताल का अधिकार ही छीन लिया जाए, तो उसके पास अपने शोषण के खिलाफ लड़ने का कोई रास्ता नहीं बचता। यह संविधान के अनुच्छेद 19 पर सीधा हमला है।

उन्होंने आगे कहा कि नए श्रम कानूनों के जरिए स्थायी रोजगार को खत्म कर ठेका प्रथा को खुली छूट दी जा रही है। अब मालिक को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह मजदूर को बिना कारण, बिना जवाबदेही और बिना मुआवज़े के नौकरी से निकाल सके। यह व्यवस्था मजदूर को पूरी तरह असुरक्षित और मालिक को सर्वशक्तिमान बनाती है।

सिंह ने आरोप लगाया कि इन कानूनों के माध्यम से ट्रेड यूनियनों को कमजोर करने की साजिश रची गई है। यूनियन बनाना कठिन कर दिया गया है और मान्यता प्राप्त करना लगभग असंभव बना दिया गया है, ताकि मजदूर संगठित न हो सकें और उनकी आवाज़ को आसानी से दबाया जा सके।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये कानून मजदूरों के लिए नहीं, बल्कि अडानी-अंबानी जैसे बड़े कॉर्पोरेट घरानों के हित में बनाए गए हैं। सरकार के लिए मजदूर सिर्फ आंकड़े हैं; उनका जीवन, स्वास्थ्य और परिवार उसकी प्राथमिकता में नहीं है।

सिंह ने यह भी कहा कि इन श्रम कानूनों को लागू करने से पहले न तो संसद में गंभीर बहस कराई गई, न मजदूर संगठनों से सलाह ली गई और न ही राज्यों की राय ली गई। इससे स्पष्ट होता है कि यह सरकार जनता की नहीं, बल्कि पूंजी की सरकार है।

अंत में उन्होंने देश के सभी मजदूरों, कर्मचारियों और मेहनतकश वर्ग से 12 तारीख की देशव्यापी हड़ताल को पूरी मजबूती से सफल बनाने की अपील करते हुए कहा कि यह हड़ताल अपने हक़, अधिकार और सम्मान की रक्षा की निर्णायक लड़ाई है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस पार्टी मजदूरों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है और इन श्रम-विरोधी कानूनों को वापस लेने तक संघर्ष जारी रहेगा।

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