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Sunday, July 26, 2026

धनबाद में लिट्टी-चोखा और घुघनी के नाम पर खुलेआम लूट! खाद्य सुरक्षा विभाग की रहस्यमयी चुप्पी…

धनबाद(DHANBAD):भोजपुरी अभिनेता और गोरखपुर के भाजपा सांसद रवि किशन का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। संसद में खाद्य पदार्थों की कीमत, गुणवत्ता और मात्रा में असंतुलन का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने सवाल किया कि एक समोसे की कीमत हर राज्य में अलग क्यों है? उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में मिलने वाले खानपान की वस्तुओं को लेकर एक समान नीति और नियंत्रण की सख्त जरूरत है।

यह बयान धनबाद के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक है, जहां सड़क किनारे ढाबों और स्टॉल्स पर ग्राहकों से मनमानी कीमत वसूली जा रही है — बिना किसी गुणवत्ता, स्वच्छता और मात्रा की गारंटी के।

रणधीर वर्मा चौक की लिट्टी दुकान पर सवाल

धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर गया सिंह और रामचंद्र सिंह की लिट्टी दुकानें इस समय चर्चा में हैं। यहां घी लगी लिट्टी की कीमत 35 रुपये, जबकि सादी लिट्टी 25 रुपये में बेची जा रही है।
ग्राहकों का कहना है कि एक लिट्टी में कितना आटा, सत्तू, मसाले, और चोखा कितना दिया जा रहा है, इसकी कोई गणना नहीं। सिर्फ नाम और चलती दुकान का हवाला देकर खुलेआम अधिक कीमत वसूली जा रही है, वह भी बिना स्वच्छता के।

ग्राहकों ने शिकायत की है कि जहां चोखा तैयार किया जाता है, वहां बदबू और गंदगी से खड़ा रहना मुश्किल होता है। घी की गुणवत्ता भी संदिग्ध है। कई बार इस्तेमाल हो चुका लो-ग्रेड घी बार-बार गर्म किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

30 रुपये की घुघनी में 10 रुपये का भी माल नहीं!

गौशाला इलाके की एक प्रसिद्ध सेव घुघनी दुकान में एक प्लेट की कीमत 30 रुपये है, जबकि चना, प्याज, मसाले और सेव मिलाकर कुल लागत मुश्किल से 10 रुपये बैठती है। फिर भी ग्राहकों से तीन गुना वसूला जा रहा है।

मिठाई की दुकानों पर भी ‘मीठी लूट’

धनबाद की ब्रांडेड मिठाई दुकानों में भी हालात कम खराब नहीं हैं।
रसगुल्ला, गुलाब जामुन, काजू कतली, गोंद लड्डू और पिस्ता रोल जैसी मिठाइयों की कीमतें आसमान छू रही हैं, जबकि क्वालिटी और शुद्धता की कोई गारंटी नहीं।
ग्राहकों का आरोप है कि इन मिठाइयों में कृत्रिम रंग, स्वाद और मिलावटी घी का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग आंख मूंदे बैठा है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की रहस्यमयी चुप्पी

इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि धनबाद का खाद्य सुरक्षा विभाग आखिर क्यों चुप है?

  • क्या नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा?
  • क्या इन दुकानों के लाइसेंस, स्वच्छता प्रमाणपत्र और खाद्य सैंपल की जांच नहीं की जा रही?

स्थानीय जनप्रतिनिधियों, उपभोक्ता संगठनों और प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।
लोगों के स्वास्थ्य और जेब से हो रही इस लूट को रोका जाना जरूरी है।

 

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