धनबाद: एक सौ वर्षों की विरासत, शोध और तकनीकी नेतृत्व का जश्न मनाते हुए IIT (ISM) धनबाद ने अपना ऐतिहासिक 100वां स्थापना दिवस भव्यता के साथ मनाया। पेनमैन ऑडिटोरियम में आयोजित मुख्य समारोह में अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। यह आयोजन 3 से 9 दिसंबर तक चले सेंटेनरी फाउंडेशन वीक का औपचारिक समापन था, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने की थी।
Highlights:
सप्ताहभर चले कार्यक्रम—सिम्पोजियम, रिसर्च एक्सपो, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, एलुमनाई मिलन और सामुदायिक आउटरीच—ने संस्थान की एक सदी की यात्रा और भविष्य के विज़न को रेखांकित किया। समारोह का संचालन डीन (कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन) प्रो. रजनी सिंह ने किया।
गौतम अडानी का विज़नरी संबोधन: ऊर्जा सुरक्षा, संसाधन नियंत्रण और भारत की विकास नीति पर जोर
अपने संबोधन में गौतम अडानी ने कहा कि बदलते वैश्विक समीकरणों के दौर में भारत को स्वनिर्धारित विकास मॉडल अपनाना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि 21वीं सदी में किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता उसकी ऊर्जा प्रणाली और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण से तय होती है।
अडानी ने कहा—“पैरों के नीचे की संपदा को समझिए और उस ऊर्जा को साधिए जो भारत की वृद्धि को गति देती है—इन्हीं पर आर्थिक स्वतंत्रता टिकी है।”
उन्होंने “नैरेटिव कॉलोनाइज़ेशन” पर आगाह करते हुए कहा कि इतिहास में बड़े उत्सर्जनकर्ता देश विकासशील देशों पर नियम थोपकर उनकी प्रगति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेताया—
“यदि हम अपनी कहानी खुद नहीं लिखेंगे, तो हमारी तरक्की को अपराध की तरह पेश किया जाएगा।”
अडानी ने भारत की उपलब्धि—50% से अधिक नॉन-फॉसिल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी—का उल्लेख किया और अडानी ग्रुप की प्रमुख परियोजनाएँ जैसे कार्माइकल माइन और खवडा ग्रीन एनर्जी पार्क की चर्चा की।
उन्होंने IIT (ISM) के लिए 50 वार्षिक पेड इंटर्नशिप, प्री-प्लेसमेंट ऑफर, और TEXMiN के सहयोग से Adani 3S Mining Excellence Centre स्थापित करने की घोषणा की। अडानी ने इसे भारत का “दूसरा स्वतंत्रता संग्राम”—आर्थिक और संसाधन आत्मनिर्भरता का संघर्ष—बताया।
संस्थान की 100 वर्ष की यात्रा — नेतृत्व का संदेश
प्रो. प्रेम व्रत, चेयरमैन (BoG), ने कहा कि 1926 में बोया गया एक विचार आज वैश्विक मानकों वाला बहुविषयक संस्थान बन चुका है।
निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने कहा कि IIT (ISM) की यात्रा भारत की वैज्ञानिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने ऊर्जा, AI, स्थिरता और सामाजिक शोध के क्षेत्रों में संस्थान की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।
फिल्म, सम्मान, उद्घाटन और समापन
- समारोह में संस्थान की 100 वर्ष की यात्रा पर आधारित विशेष फिल्म प्रदर्शित की गई।
- शोध, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता में योगदान देने वाले चयनित प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
- मुख्य अतिथि ने TEXMiN भवन में Adani Centre of Excellence का उद्घाटन किया।
- कार्यक्रम का समापन डिप्टी डायरेक्टर प्रो. धीरज कुमार के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।
सौ साल की विरासत, अगले सौ साल की दिशा
IIT (ISM) धनबाद अब अपने दूसरे शतक में प्रवेश कर रहा है—एक नया चरण, जिसका उद्देश्य है भारत के लिए अगली पीढ़ी के वैज्ञानिक, तकनीकी और नवाचार-आधारित नेतृत्व का निर्माण।






















