रांची: अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर झारखंड के कई जन-संगठनों ने एकजुट होकर राज्य और केंद्र सरकार पर गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए। इस विरोध कार्यक्रम का आयोजन झारखंड जनअधिकार महासभा, PUCL, आदिवासी विमेंस नेटवर्क, AIPWA सहित कई सामाजिक संगठनों ने मिलकर किया।
प्रदर्शनकारियों ने मानवाधिकार के विभिन्न मोर्चों पर हो रहे दमन और अनियमितताओं को रेखांकित किया। उनके प्रमुख आरोप इस प्रकार रहे:
प्रमुख आरोप
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय पर बढ़ती हिंसा और दमन
ग्रामसभा की अनुमति के बिना सुरक्षा बलों के कैंपों का निर्माण
जबरन खनन परियोजनाएँ, विस्थापन और आजीविका पर गहरा असर
उमर खालिद, शरजील इमाम और सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और कथित प्रताड़ना
UAPA के तहत झूठे/मनगढ़ंत मामलों का दर्ज होना
विचाराधीन कैदियों को बिना न्यायिक सुनवाई लंबे समय तक जेल में रखना
महिलाओं के अधिकारों का व्यवस्थित उल्लंघन
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पोस्टर, बैनर और नारे लगाकर इन मुद्दों पर तत्काल हस्तक्षेप और न्याय की मांग की।
आंदोलन में शामिल प्रतिनिधियों ने कहा कि देश और राज्य में लोकतांत्रिक अधिकारों का निरंतर हनन हो रहा है, जबकि सरकारें जवाबदेही से बचती दिख रही हैं।
इस विरोध कार्यक्रम में आकांशा बिहान, अलोका कुजूर, सिसिलिया लकड़ा, आशीष रौशन, लीना, नदीम, नंदिता, रिया, तुलिका पिंगुआ, रोज़, मधु तिर्की, रौशन होरा, सिराज दत्ता, शशि, टॉम, ज़ियाउल्ला सहित कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
मानवाधिकार दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर हुआ यह प्रदर्शन राज्य में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएँ उठाता है। संगठनों ने कहा कि जब तक न्याय और संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित नहीं होते, ऐसे आंदोलन और पहलें जारी रहेंगी।






















