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Sunday, July 26, 2026

“वर्दी, संवेदनशीलता और अनुशासन: एक डांस ने बदल दी थानेदार अलिसा कुमारी की पोस्टिंग”…

धनबाद: धनबाद जिला बल में महज दो वर्ष पहले आई 2018 बैच की अवर निरीक्षक (दारोगा) अलिसा कुमारी पुलिस की वर्दी में भी एक सहज सरल और संवेदनशील महिला है। डेढ़ वर्ष पूर्व अगस्त महीने में उन्हें राजगंज का थानेदार बनाया गया। पुलिसिंग की माहिर खिलाड़ी थी, फरियादियों के लिए सहज सुलभ रहती थी। लेकिन दो दिनों पूर्व उनकी एक मामूली चूक से वो लाइन क्लोज हो गई। गलती ये थी वे वर्दी में रहते हुए एक भोजपुरी गाने में थिरक गई, वीडियो वायरल हो गया।एसएसपी ने बिना देर किए इसे विभाग की अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें थाने से हटा दिया। एसएसपी की इस दंडात्मक कार्रवाई से राजगंज की सैकड़ों महिलाएं आहत हो गई। महिलाओं का कहना है कि उन्हीं के चलते वे सफरर हो गईं। क्योंकि उन्हीं के आग्रहपूर्ण दबाव के कारण उन्होंने डांडिया में डांस किया था। कार्रवाई के बाद बाजार और गांव की सैकड़ों महिलाओं ने ऑटो टोटो कार वगैरह बुक कर एसएसपी से मिलने का मन बनाया था। उनका कहना है कि कसूर थानेदार का नहीं था,बल्कि कसूरवार हम महिलाएं हैं जिनकी जिद पर उन्होंने नृत्य किया था। लेकिन अलिसा ने करने से महिलाओं को मना कर दिया।

राजगंज में कई वर्षों से रामनवमी के साथ चैती दुर्गापूजा का आयोजन होते आ रहा है। इसमें आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोग शरीक होते हैं और दुर्गोत्सव के साथ सप्ताहव्यापी मेले का आनंद उठाते हैं। आगाज से अंत तक शांति बनी रहती है।इसकी सतत निगरानी की जिम्मेदारी राजगंज के थानेदार सहित वहां के पुलिस दल बल की होती है। दो दिनों पूर्व रात डांडिया का कार्यक्रम चल रहा था। वहां दर्जनों महिलाएं नृत्य कर रहीं थी। संयोग से स्थानीय पब्लिक फ्रेंडली थानेदार अलिसा कुमारी भी वहां आ जाती हैं। महिलाओं ने उनसे काफी भाव भक्ति के साथ आग्रह किया कि मैम आप भी दो मिनट का वक्त साझा कीजिए प्लीज। मैडम ने पहले तो कहा कि वर्दी में हूं,ऐसा करना उचित नहीं होगा। महिलाएं जिद करने लगीं तो उन्होंने आग्रह स्वीकार करते हुए संभ्रांत महिलाओं का हिस्सा बन गई। जमाना ऐसा है कि लोगों ने नृत्य का लुत्फ भी उठाया और वीडियो बनाकर पब्लिक डोमेन में साझा भी कर दिया।अगर थानेदार अपना एटीट्यूड दिखाती और समूह का स्नेह ठुकरा देती तो शायद अच्छा होता।

दूसरी बात कि धनबाद जिला में लगभग पांच दर्जन थाना और ओपी हैं,जबकि चार सौ से अधिक दारोगा इंस्पेक्टर हैं। एक दर्जन तो अपग्रेडेड थाने हैं जहां इंस्पेक्टर थानेदार होते हैं। सर्किल में भी उन्हीं का अधिकार है।बाकी बचे थाना और ओपी में 2012 और 2018 बैच के दरोगाओं की पोस्टिंग होती है। लगभग दो दर्जन थाना और ओपी में 2018 बैच के दरोगा पोस्टेड हैं।बड़ी मुश्किल से धनबाद में थानेदारी मिलती है। जरा सा लाइन लेंथ बिगड़ा तो हवा हो जाइए। फिर दोबारे खाता खुलना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में अलिसा को जरा बचके सम्हल के चलने की जरूरत थी।

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