बीएड कॉलेज की मांग ने पकड़ा जोर, कहा — सपना अधूरा न रह जाए
जामताड़ा:“हमारे माता-पिता खेतों में मेहनत करते हैं, हम क्यों न अपने गांव में पढ़ सकें?”
कुछ ऐसे ही सवाल और भावनाएं झलक रही हैं नाला विधानसभा क्षेत्र के छात्र-छात्राओं की आंखों में, जहां बीएड कॉलेज की अनुपलब्धता ने युवाओं का भविष्य अधर में लटका दिया है। शिक्षा की कमी का दर्द अब आवाज़ बनकर सामने आने लगा है — और यह आवाज़ शिक्षा के एक स्थायी केंद्र की मांग कर रही है।
Highlights:
“बाहर पढ़ना सपना बन गया है”
स्थानीय छात्र-छात्राओं का कहना है कि उन्हें शिक्षक प्रशिक्षण (बीएड) की पढ़ाई के लिए झारखंड के बाहर जाना पड़ता है, जो गरीब और किसान परिवारों के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं है।
एक छात्रा ने आंसुओं के साथ कहा:
“हमारे माता-पिता दिन-रात खेतों में काम करते हैं, लेकिन बाहर जाकर पढ़ाई करना हमारे लिए अब भी सपना है। अगर नाला में बीएड कॉलेज खुल जाए, तो हम गांव से पढ़कर आगे बढ़ सकते हैं।”
एक बीएड कॉलेज — शिक्षा का नया द्वार
ग्रामीण अभिभावकों और शिक्षकों ने भी इस मांग का खुलकर समर्थन किया है। उनका मानना है कि यदि नाला में बीएड कॉलेज की स्थापना होती है, तो यह न केवल शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाएगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ने का मौका देगा।
एक शिक्षक ने कहा:
“बीएड कॉलेज खुलने से गांव के शिक्षित युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा, और शिक्षा का स्तर भी ऊंचा होगा।”
आवेदन की तैयारी, उम्मीद विधानसभा अध्यक्ष से
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र की जनता जल्द ही झारखंड विधानसभा अध्यक्ष श्री रविंद्रनाथ महतो को एक लिखित आवेदन सौंपने की योजना बना रही है। लोगों को उम्मीद है कि उनकी आवाज़ यदि विधानसभा तक पहुंचेगी, तो इस पर ठोस पहल की जा सकती है।
केवल शिक्षा नहीं, आत्मविश्वास और बदलाव की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि बीएड कॉलेज की स्थापना से केवल शिक्षा ही नहीं, आत्मविश्वास, जागरूकता और सामाजिक बदलाव भी देखने को मिलेगा।
एक ग्रामीण माता-पिता ने कहा:
“हमारे बच्चों को पढ़ने का हक चाहिए — ताकि कोई सपना गरीबी के कारण अधूरा न रह जाए।”





















