पटना: बिहार में शुक्रवार से शुरू हुई समृद्धि यात्रा के पहले ही दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा और अहम ऐलान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए सख्त नीति लाने जा रही है। इस कदम को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति और मरीजों को समय पर इलाज मिलना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से यह शिकायत मिल रही है कि कई डॉक्टर ड्यूटी के समय निजी क्लीनिकों में व्यस्त रहते हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित होती हैं। इसी को देखते हुए नई नीति लाई जा रही है।
समृद्धि यात्रा के मंच से मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि स्वास्थ्य विभाग जल्द ही इस संबंध में नई गाइडलाइन और स्पष्ट नियमावली जारी करेगा। इसमें निजी प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध या सीमित शर्तों के साथ अनुमति को लेकर निर्णय लिया जाएगा। नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुविधाओं, संसाधनों और कार्यपरिस्थितियों में लगातार सुधार कर रही है, ताकि उन्हें निजी प्रैक्टिस की जरूरत न पड़े। सरकारी अस्पतालों में इंफ्रास्ट्रक्चर, दवाइयों और आधुनिक उपकरणों को मजबूत किया जा रहा है।
समृद्धि यात्रा के दौरान पश्चिम चंपारण में करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया गया। कृषि, सड़क, उद्योग, पेयजल और जनकल्याण के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार का यह ऐलान यात्रा का सबसे अहम संदेश बनकर उभरा।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति सख्ती से लागू होती है, तो बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा सुधार संभव है।






















