बीसीसीएल (BCCL) कुसुंडा एरिया-6, ऐना कोलियरी में कार्यरत आर के माइनिंग बंद होने का नोटिस, मजदूरों में गहरी चिंता
झारखंड के धनबाद जिले के झरिया क्षेत्र में स्थित बीसीसीएल (BCCL) कुसुंडा एरिया-6, ऐना कोलियरी में कार्यरत आर के माइनिंग के बंद होने की सूचना ने लगभग 1500 मजदूरों के सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। कंपनी की कार्य अवधि 25 मई को समाप्त हो रही है और इसके साथ ही मजदूरों का भविष्य अधर में लटक गया है।
Highlights:
मजदूरों की आंखों में चिंता और अनिश्चितता
कंपनी ने परिसर में सेवा समाप्ति का नोटिस चिपका दिया है, जिससे मजदूरों की रोजी-रोटी पर तलवार लटक गई है। वर्षों से खून-पसीना बहाने वाले मजदूरों को अब यह चिंता सता रही है कि उनके परिवार का गुजारा कैसे होगा।
10 साल की मेहनत और एक झटके में खत्म आशा
आर के माइनिंग कंपनी ने पिछले एक दशक में बीसीसीएल (BCCL) को अच्छा लाभ दिया, फिर भी मजदूरों के लिए कोई वैकल्पिक योजना या नौकरी की व्यवस्था सामने नहीं आई। अब यूनियन नेता भी चिंता में हैं कि इन मजदूरों के लिए नया रोजगार कैसे और कहां से मिलेगा।
मजदूरों की पीड़ा: “हमें खैरात नहीं, काम चाहिए”
मजदूरों का साफ कहना है कि वे मजबूर नहीं, मेहनतकश हैं। उन्हें किसी रहम की नहीं, सिर्फ एक सम्मानजनक काम और मेहनताना की दरकार है, ताकि वे अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतें पूरी कर सकें।
कंपनी बंद, सपने बंद: अब आगे क्या?
कंपनी ने टेंडर अवधि पूरी होने पर नोटिस जारी किया है कि 25 मई के बाद सेवा समाप्त मानी जाएगी। लेकिन मजदूरों की ओर से पूछा जा रहा है – “अब आगे क्या?” उनके पास कोई विकल्प नहीं है।
यह भी पढ़े : पानी की किल्लत से जूझ रहे रघुनाथपुर पंचायत के ग्रामीण, घंटों लाइन में लगने के बाद मिलता है पीने का पानी
सरकार और यूनियन की भूमिका पर सवाल
जब सरकार “हर हाथ को काम” का दावा करती है, तो ऐसी स्थिति में उन दावों की सच्चाई सामने आ जाती है। अब देखना यह है कि प्रशासन, बीसीसीएल (BCCL) और यूनियन मिलकर इन मजदूरों के लिए क्या समाधान निकालते हैं।
प्रमुख सवाल उठ खड़े हुए हैं:
क्या इन मजदूरों को वैकल्पिक रोजगार मिलेगा?
सरकार और बीसीसीएल (BCCL) क्या हस्तक्षेप करेंगे?
यूनियन नेताओं की ज़िम्मेदारी क्या होगी?
मजदूरों के लिए पुनर्वास योजना कब बनेगी?
आर के माइनिंग के बंद होने से मजदूरों का केवल रोजगार नहीं, बल्कि जीवन की स्थिरता खतरे में आ गई है। यह समय है जब नीतिगत हस्तक्षेप हो और इन श्रमिकों को दूसरा मौका और सम्मानजनक जीवन मिले। सवाल सिर्फ एक कंपनी के बंद होने का नहीं है, सवाल हजारों परिवारों के भविष्य का है।






















