धनबाद:भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएसएम), धनबाद को यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि खनन इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पतीतापबन साहू को वर्ष 2024–25 के लिए एमजीएमआई नॉन-कोल माइनिंग अवॉर्ड के लिए चुना गया है। यह निर्णय माइनिंग, जियोलॉजिकल एंड मेटालर्जिकल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एमजीएमआई) की जजिंग कमेटी की बैठक में 7 सितम्बर 2025 को लिया गया। यह पुरस्कार उन्हें 27 सितम्बर 2025, शनिवार को सुबह 11:30 बजे कोलकाता स्थित हयात रीजेंसी होटल में आयोजित एमजीएमआई की 119वीं वार्षिक आम बैठक के दौरान प्रदान किया जाएगा।
डॉ. साहू ने 2010 में एनआईटी राउरकेला से बी.टेक (खनन इंजीनियरिंग) किया और 2015 में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अल्ट्राटेक सीमेंट, आदित्य बिड़ला समूह में ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी के रूप में की और इसके बाद शैक्षणिक क्षेत्र में योगदान देना शुरू किया। उनका शोध कार्य मुख्य रूप से माइन वेंटिलेशन, माइन फायर, कोल बेड मीथेन, खानों में रेडिएशन मॉनिटरिंग और माइन एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने एक किताब और 31 शोध पत्र प्रकाशित किए हैं, जिनमें से 21 प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय जर्नलों में छपे हैं। उनके नेतृत्व में तीन सरकारी वित्तपोषित शोध परियोजनाएँ और 17 उद्योग-प्रायोजित परियोजनाएँ पूरी की गई हैं, जिनसे कोयला और धातु खदानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान हुआ है। डॉ. साहू ने अब तक एक पीएचडी शोधार्थी, आठ स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और कई स्नातक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है और वर्तमान में तीन पीएचडी विद्यार्थियों का निर्देशन कर रहे हैं।
उनके योगदान को पहले भी कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है, जिनमें 2015 में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के 90वें स्थापना दिवस पर मिला कैनरा बैंक रिसर्च पब्लिकेशन अवॉर्ड, 2014 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की इंटरनेशनल ट्रेवल सपोर्ट स्कीम, और 2014 में आईएसएम एल्युमनाई एसोसिएशन का इंटरनेशनल ट्रेवल ग्रांट शामिल हैं।
संस्थान को डॉ. साहू की इस उपलब्धि पर गर्व है और उन्हें इस सम्मान के लिए हार्दिक बधाई देता है। यह उपलब्धि संस्थान की शैक्षणिक, शोध और उद्योग सहयोग की उत्कृष्ट परंपरा को और मजबूत करती है।






















