
निरसा: निरसा क्षेत्र में सिझानु पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर निरसा के खुसरी पंचायत के मुखिया एवं समाजसेवी सपन गौराई के आवास पर भी सिझानु पर्व का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस आयोजन में मुख्य रूप से गुरुदास चटर्जी फाउंडेशन के मीडिया प्रभारी प्रभु सिंह, मनु सिंह, दिनेश चक्रवर्ती, अरूप गौराई, कृष्णा रजक सहित अन्य लोग मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया।
पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुखिया सपन गौराई ने बताया कि बसंत पंचमी के पश्चात शीतल षष्ठी के दिन सिझानु पर्व मनाया जाता है। यह पर्व माताओं द्वारा अपने बच्चों की भलाई और स्वास्थ्य की कामना को लेकर व्रत के रूप में किया जाता है। इस दिन बंगाली समाज के घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और एक दिन पहले पकाया गया भोजन ग्रहण करने की परंपरा है।
उन्होंने बताया कि इस दिन विभिन्न प्रकार की सब्जियां, मछली, चावल एवं दाल एक दिन पूर्व पकाकर ठंडा भोजन किया जाता है। चूल्हे के साथ-साथ सिल-जोनोंरा को भी इस दिन विश्राम दिया जाता है। शीतल षष्ठी के दिन ठंडा भोजन करने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है, क्योंकि यह समय वसंत ऋतु एवं चेचक जैसी बीमारियों का होता है, ऐसे में बासी भोजन शरीर को ठंडक प्रदान करता है। मेडिकल भाषा में इसे आरामदायक भोजन कहा जाता है।
चूंकि यह पर्व षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, इसलिए इस दिन छह प्रकार की मौसमी सब्जियों को एक साथ उबालकर खाने की परंपरा है, जिसे “गोटा सिद्ध” कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से आलू, बीन्स, सेम, बैंगन, पालक, कलाई, मूंग सहित विभिन्न प्रकार की दालें शामिल होती हैं।
हजारों वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को मानभूम क्षेत्र में “सिझान” अथवा “बासी भात उत्सव” के नाम से जाना जाता है।






















