महापौर की जेनरल सीट पर दिग्गजों से लेकर युवा चेहरों तक ने कसी कमर,कोयलांचल में मचने वाली है सियासी घमासान
धनबाद: निगम चुनाव जल्द कराए जाने की सुगबुगाहट के साथ ही कोयलांचल धनबाद का राजनीतिक पारा चढ़ गया है।
हालांकि चुनाव आयोग ने अब तक तिथि की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन तैयारियां लगभग पूरी मानी जा रही हैं।
संभावना जताई जा रही है कि इस वर्ष के अंत तक या जनवरी 2026 में धनबाद नगर निगम चुनाव संपन्न कराया जा सकता है।
Highlights:
इस बार महापौर की सीट जेनरल होने से कई पुराने खिलाड़ी और नए चेहरे मुस्कुराने लगे हैं — और सब अपने-अपने तरीके से मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।
एक्स महापौर चंद्रशेखर अग्रवाल या उनकी पत्नी फिर दिख सकते हैं मैदान में
धनबाद नगर निगम के पूर्व महापौर चंद्रशेखर अग्रवाल या उनकी पत्नी एक बार फिर चुनावी रणभूमि में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
राजेंद्र सरोवर का सौंदर्यीकरण, रणधीर वर्मा स्टेडियम परिसर में अत्याधुनिक पार्क, और 8 लाइन सड़क परियोजना — ये उनके कार्यकाल की पहचान रही है।
उनके समर्थकों का दावा है कि विकास कार्यों के आधार पर उन्हें व्यवसायी वर्ग से लेकर आम जनता तक का समर्थन मिलेगा।
मेंशन से सिद्धार्थ गौतम – मज़दूरों के सहारे मजबूत दावेदारी
हिन्द खान मज़दूर सभा के कार्यकारी अध्यक्ष सिद्धार्थ गौतम, मेंशन परिवार के युवराज, महापौर पद के लिए एक सशक्त नाम के रूप में उभर रहे हैं।मज़दूर संगठन में उनकी पकड़, और विधायक रागिनी सिंह से पारिवारिक राजनीतिक सहयोग, उन्हें एक बड़ा बढ़त दे सकता है।पूर्व विधायक संजीव सिंह की हालिया सक्रियता ने मेंशन समर्थकों में जोश भर दिया है, जिसका सीधा असर चुनाव पर पड़ सकता है।
मयूर शेखर झा — कांग्रेस से भाजपा तक की सियासी यात्रा
धनबाद की सियासत में एक और चर्चित नाम मयूर शेखर झा हैं।
कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले मयूर झा बीसीसीएल अप्रेंटिस के मुद्दे पर दिल्ली तक आवाज उठा चुके हैं।युवाओं में उनकी लोकप्रियता और पार्टी में बढ़ता कद उन्हें भाजपा का दमदार दावेदार बना रहा है।
साथ ही,भृगुनाथ भगत भी भाजपा से दावेदारी की तैयारी में हैं।
शांतनु चंद्र – युवा व्यवसायी से समाजसेवी तक
युवा व्यवसायी शांतनु चंद्र भी संभावित प्रत्याशियों में शामिल हैं।
शिक्षा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवा और व्यवसायी वर्ग का प्रिय चेहरा बना दिया है।
शहर के होर्डिंग्स पर उनकी बढ़ती मौजूदगी राजनीतिक संकेत दे रही है कि वे मैदान में उतरने को तैयार हैं।
भाजपा नेता शिव कुमार यादव भी रेस में
पूर्व पार्षद और भाजपा नेता शिव कुमार यादव भी महापौर पद की रेस में हैं।
कोलियरी क्षेत्र की समस्याओं को लेकर मुखर रहने वाले यादव को जमीनी नेता के रूप में जाना जाता है।पिछले निकाय चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर चुके यादव पार्टी संगठन में सक्रिय चेहरा हैं।
रघुकुल फिर सुर्खियों में – बदल सकते हैं समीकरण
धनबाद की राजनीति में “रघुकुल” नाम सम्मान और प्रभाव का प्रतीक है।
पूर्व विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह के विकास कार्यों का असर आज भी झरिया में दिखता है।
ऐसे में अटकलें हैं कि इस घराने से कोई सदस्य महापौर पद की रेस में उतरे तो समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
इसके साथ ही रामाधीर सिंह परिवार से भी किसी प्रत्याशी के आने की चर्चा है।
युवा संघर्ष मोर्चा और मानव अधिकार संगठन भी तैयार
मुख्यधारा की पार्टियों के अलावा सामाजिक संगठनों ने भी कमर कस ली है।युवा संघर्ष मोर्चा ने समाजसेवी दिलीप सिंह के समर्थन में प्रचार अभियान शुरू कर दिया है।
वहीं मानव अधिकार प्रोटेक्शन संगठन के प्रदेश सचिव सुदीष्ट कुमार भी दावेदारी पेश कर सकते हैं।जनसेवा और जनता से जुड़ाव उन्हें एक मजबूत स्वतंत्र उम्मीदवार बना सकता है।
JLKM भी दे सकती है कड़ी टक्कर
JLKM के केन्द्रीय प्रवक्ता ने ISBT बस स्टैंड मुद्दे पर जोरदार आवाज उठाई थी।
निगम क्षेत्र की समस्याओं पर उनकी लगातार मुखरता के चलते यह संगठन भी इस बार चुनावी मैदान में ताल ठोकने की तैयारी में है।
कई वार्डों में JLKM समर्थित प्रत्याशी भी उतर सकते हैं।
अब निगाहें चुनाव तिथि पर – जनता बोलेगी विकास की भाषा या परंपरागत समीकरणों की?
फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से तारीख का ऐलान बाकी है,
पर सियासी हलकों में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है।
सोशल मीडिया से लेकर गली-मोहल्लों तक, हर जगह पोस्टर, प्रचार और रणनीतियों का दौर चल पड़ा है।
नगर निगम क्षेत्र के मतदाता इस बार विकास, स्वच्छता, ट्रैफिक नियंत्रण, जल निकासी और नागरिक सुविधाओं को तरजीह देना चाहते हैं





















