झारखंड शराब घोटाला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) सीनियर IAS विनय चौबे को किया गिरफ्तार
रांची, 20 मई: झारखंड में बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच कर रही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय चौबे को मंगलवार शाम गिरफ्तार कर लिया। यह झारखंड में पिछले 15 वर्षों में किसी सर्विसिंग IAS अधिकारी के खिलाफ एसीबी की पहली गिरफ्तारी है, जिसने राज्य में हड़कंप मचा दिया है।
Highlights:
ACB की कार्रवाई और पूछताछ
झारखंड ACB की टीम ने मंगलवार सुबह ही चौबे के आवास पर छापेमारी की। इसके बाद करीब 11 बजे उन्हें पूछताछ के लिए ACB कार्यालय ले जाया गया। करीब 6 घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए सिविल अस्पताल ले जाया गया और फिर विनय चौबे को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद चौबे को रांची सिविल कोर्ट स्थित ACB की विशेष अदालत में पेश किया गया।
घोटाले से जुड़ा छत्तीसगढ़ कनेक्शन
ACB ने 2022 में झारखंड में लागू की गई नई उत्पाद नीति (Excise Policy) में गड़बड़ियों को लेकर चौबे से पूछताछ की। उस वक्त वे झारखंड के उत्पाद विभाग (Excise Department) में सचिव के पद पर थे। जांच में सामने आया कि छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में लिप्त सिंडिकेट ने ही झारखंड में भी उसी मॉडल पर घोटाला किया, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि एक संगठित सिंडिकेट ने झारखंड में होलोग्राम सप्लाई और शराब डिस्ट्रीब्यूशन के ठेके हासिल कर गड़बड़ियां कीं।
ED और EOW की रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ EOW की एफआईआर और ED की जांच रिपोर्ट के आधार पर झारखंड ACB ने राज्य सरकार से अनुमति लेकर प्रारंभिक जांच (PE) शुरू की थी। जांच में मिले पुख्ता सबूतों के बाद FIR दर्ज की गई और फिर उनको पूछताछ के लिए बुलाया गया।
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चौबे ने दी सफाई, लेकिन ACB को नहीं मानी दलील
पूछताछ के दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि “उत्पाद नीति राज्य सरकार की सहमति से लागू की गई थी।” लेकिन ACB को जांच में नीति में जानबूझकर किए गए संशोधनों के प्रमाण मिले, जिनसे छत्तीसगढ़ के सिंडिकेट को लाभ पहुंचा।






















