छपरा: सारण जिले की राजनीति में आज बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब जदयू का एक मजबूत स्तंभ माने जाने वाले अल्ताफ आलम राजू ने पार्टी से इस्तीफा देकर राजद की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस घटनाक्रम को आगामी चुनाव से पहले जदयू के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
अल्ताफ आलम राजू पहले सारण जिला जदयू के अध्यक्ष रह चुके हैं और मढ़ौरा विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के प्रमुख दावेदार थे। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने मढ़ौरा सीट से जदयू प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था और राजद विधायक जितेंद्र राय को कड़ी टक्कर दी थी।
इस बार मढ़ौरा सीट लोजपा (रामविलास पासवान गुट) के खाते में चली गई, जिससे नाराज़ होकर राजू ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया। हालांकि, नामांकन पत्र में त्रुटि के कारण उनका नामांकन रद्द हो गया। इसी तरह लोजपा की सीमा सिंह समेत चार उम्मीदवारों के नामांकन भी खारिज कर दिए गए।
नामांकन रद्द होने के बाद अल्ताफ आलम राजू के पास कोई राजनीतिक विकल्प नहीं बचा और उन्होंने राजद का दामन थाम लिया। बताया जा रहा है कि उनकी राजद में शामिल होने में मढ़ौरा विधायक जितेंद्र राय और तरैया के राजद प्रत्याशी शैलेंद्र प्रताप सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जदयू ने राजू के बागी तेवर अपनाने के बाद उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था और बैजनाथ प्रसाद विकल को सारण जिला जदयू का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अल्ताफ आलम राजू के राजद में जाने से सारण जिले की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है। वे लंबे समय से मढ़ौरा क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और उनका स्थानीय जनाधार भी मजबूत माना जाता है।






















