नवरात्रि के दिनो में देवी पूजा के लिए महाअष्टमी तिथि बेहद शुभ और मंगलदायी मानी गई है क्योंकि इस दिन देवी भगवती के आठवें स्वरूप यानि मां महागौरी की पूजा होती है. हिंदू मान्यता के अनुसार माता का यह दिव्य स्वरूप अत्यंत ही तेजवान है और इनकी पूजा सबसे जल्दी फलदायी होती है. मां महागौरी भगवान महादेवी की अर्धांगिनी के रूप में भी पूजी जाती है. मान्यता है कि जो कोई साधक मां महागौरी की पूजा सच्चे मन से करता है, उस पर देवी प्रसन्न होकर अपनी कृपा लुटाती हैं. देवी के साधक को सभी प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती है. आइए नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजाा की विधि और मंत्र आदि के बारे में जानते हैं.
Highlights:
महाअष्टमी और मां महागौरी की पूजा
तिथि: 30 सितंबर 2025 (सोमवार)
अष्टमी तिथि आरंभ: 29 सितंबर 2025, दोपहर 4:31 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 30 सितंबर 2025, शाम 6:06 बजे
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:47 से दोपहर 12:35 तक
मां महागौरी का स्वरूप
- रंग: पूर्ण रूप से श्वेत (गौरवर्ण)
- वस्त्र: श्वेत वस्त्र धारण किए
- वाहन: वृषभ (बैल)
- चार भुजाएं:
- दाहिनी ओर का ऊपर वाला हाथ: अभय मुद्रा
- दाहिनी ओर का नीचे वाला हाथ: त्रिशूल
- बाईं ओर का ऊपर वाला हाथ: डमरू
- बाईं ओर का नीचे वाला हाथ: वर मुद्रा
पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान के बाद संकल्प लें
- ईशान कोण में मां की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
- मां को गंगाजल से स्नान कराएं
- सफेद पुष्प, धूप-दीप, रोली-चंदन अर्पित करें
- नारियल, खीर, व अन्य सफेद वस्तुओं का भोग लगाएं
- नीचे दिए गए मंत्रों का जप करें
मंत्र
प्रार्थना मंत्र
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः.
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा.
देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:.
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:.
जप मंत्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः.
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नम:.
विशेष उपाय
- भोग: नारियल, खीर, सफेद मिठाई
- पुष्प: रात की रानी, चमेली, श्वेत गुलाब
- मां को सफेद चीज़ें विशेष प्रिय हैं
कन्या पूजन
- महाअष्टमी के दिन 9 कन्याओं को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना गया है
- कन्याओं को प्रसाद, फल, उपहार व दक्षिणा दें
- इससे मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है
मां महागौरी की कथा (संक्षेप में)
हिंदू मान्यता के अनुसार जब देवी सती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठिन तप कर रही थीं तो उनके पूरे शरीर पर मिट्टी जमा हो गई थी. इसके बाद जब महादेव ने उन्हें प्रसन्न होकर अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने का आशीर्वाद दिया तो देवी ने गंगाजल में स्नान किया और उसके बाद उनका स्वरूप अत्यंत ही तेजवान दिखने लगा. माता के उस गौर वर्ण रूप को देखकर महादेव ने उन्हें महागौरी कहा. तब से भक्तगण आज तक उन्हें महागौरी के नाम से पूजते हैं.
आरती – जय महागौरी जगत की माया
जय महागौरी जगत की माया.
जया उमा भवानी जय महामाया..
हरिद्वार कनखल के पासा.
महागौरी तेरा वहां निवासा..
चंद्रकली और ममता अंबे.
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे..
भीमा देवी विमला माता.
कौशिकी देवी जग विख्याता..
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा.
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा..
सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया.
उसी धुएं ने रूप काली बनाया..
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया.
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया..
तभी मां ने महागौरी नाम पाया.
शरण आनेवाले का संकट मिटाया..
शनिवार को तेरी पूजा जो करता.
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता..
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो.
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो..





















