धनबाद :शारदीय नवरात्र का पर्व जो सनातनियों के लिये पूजा पाठ और दान धर्म का अवसर होता है
बाघमारा के पँचगढ़ी निवासी 70 वर्षीय रामचन्द्र सोनार जो मर कर भी ऐसा दान कर गए जिससे इनका पूरा परिवार तो समान की नजर से देखा जाएगा साथ ही दो जिंदगियों को भी जीने के लिए रौशनी मिलेगी।
पँचगढ़ी बाजार निवासी रामचन्द्र सोनार का देहांत कल धनबाद के एस एस एन एम सी एच में इलाज के दौरान हो गया।
ततपश्चात देश के सुप्रसिद्ध समाजसेवी कतरास निवासी अंकित राजगढ़िया जो मृतक के पुत्र मनोज सोनी के मित्र हैं अंकित ने अपने मित्र मनोज सोनी को अपने पिता के नेत्रदान के लिए प्रेरित किया और चिकित्सकीय प्रक्रिया से रामचन्द्र सोनार जी के नेत्र को प्राप्त किया गया।
इस दरमियान एक और बात देखने को मिली कि अस्पताल के चिकित्सक सहित मौजूद सभी कर्मियों ने रामचंद्र सोनार को सैल्यूट कर उन्हें अस्पताल से अंतिम विदाई दी।
अंकित राजगढ़िया जो एक ऐसे परिवार के सदस्य हैं जिनके सभी सदस्यों ने अपने अंगदान का पंजीयन करा रखा है।यही नही21 जून 2014 को उनके पिता का गिरिडीह लोकसभा से प्रथम नेत्रदान हुआ था और सुसरा उनकी बड़ी माता जी का।आज फिर एक और नेत्रदान होना काफी हर्ष का विषय है,क्योंकि मरणोपरांत मनुष्य का अंग किसी के अंधेरे जीवन मे उजियारा ला दे तो इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है।
भगवान श्रीराम चन्द्र जी ने रावण का वध कर संसार मे असत्य पर सत्य की विजय के साथ प्रकाश फैलाने का काम किया था आज फिर एक बार स्व रामचन्द्र सोनार जी ने इस दशहरे में अपने नाम के बराबर किसी दो मनुष्य के जीवन के प्रकाश फैलाने का का किया है।
उनकी अंतिम विदाई पर उनके परिजन जो मर्माहत तो थे ही पर यह संतुष्टि भी थी कि इस परिवार को समाज मे इनके कारण ही लोग सम्मान की भावना से देखेंगे।





















