धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी क्षेत्र में पेयजल संकट गहराया, ‘हर घर नल जल’ योजना पूरी तरह फेल
धनबाद, झारखंड — झारखंड के धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी प्रखंड के रघुनाथपुर पंचायत में पानी की किल्लत से ग्रामीण बेहाल हैं। गांव की करीब 35 परिवारों वाली बस्ती में एकमात्र चालू जल स्रोत के रूप में एक पुराना कुआं ही ग्रामीणों की प्यास बुझा रहा है। महिलाएं सुबह से घंटों लंबी लाइन में खड़ी होकर पानी भरती हैं, फिर बारी-बारी से अपने घर ले जाती हैं।
Highlights:
जनप्रतिनिधि गायब, ग्रामीणों की कोई नहीं सुनता
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से इस मुद्दे की शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। ग्रामीणों की आवाज़ न पंचायत तक पहुंचती है, न ही प्रखंड स्तर पर सुनवाई होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ग्रामीण अपनी समस्या लेकर जाएं तो कहां जाएं?
बस्ती का एकमात्र चापाकल वर्षों से है खराब
रघुनाथपुर पंचायत की इस बस्ती में एक मात्र चापाकल भी वर्षों से खराब पड़ा हुआ है। मरम्मत के लिए कोई पहल नहीं की गई। इससे ग्रामीणों की निर्भरता पूरी तरह से उस कुएं पर है, जिससे पूरे गांव की जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं।
‘हर घर नल जल’ योजना फेल, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी बंद
झारखंड सरकार की ‘हर घर नल जल योजना‘ का कोई असर इस गांव में नहीं दिखता। करोड़ों की लागत से बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी की सप्लाई कई महीनों से बाधित है। प्लांट की देखरेख न के बराबर हो रही है और ग्रामीणों को मजबूरन गंदा और असुरक्षित पानी पीने को विवश होना पड़ रहा है।
महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर
पानी की इस समस्या का सबसे ज्यादा असर गांव की महिलाओं और बच्चियों पर पड़ रहा है। महिलाओं को सुबह से ही बर्तन लेकर लाइन में लगना पड़ता है। कई बार पानी कम पड़ने पर झगड़े की नौबत भी आ जाती है। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि पानी भरने के लिए उन्हें कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव तक जाना पड़ता है।
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कौन सुनेगा ग्रामीणों की पुकार?
सरकार की योजना कहां है?
प्रशासन क्यों मौन है?
जनप्रतिनिधि क्यों नहीं दिखते?
आखिर ग्रामीण कितने दिन तक यूं ही प्यासे रहेंगे?
ग्रामीणों की मांग:
जल्द से जल्द चापाकल की मरम्मत की जाए।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को चालू किया जाए।
‘हर घर नल जल’ योजना को जमीनी हकीकत में उतारा जाए।






















